



आज पूर्णिमा है – आज की पूर्णिमा का पंचांग, ज्योतिषीय महत्व, राशि-वार फल, व्रत कथा, पूजा विधि और विशेष उपाय
1️⃣ आज की पूर्णिमा का पंचांग (सामान्य – IST)
(नोट: सटीक घड़ी-समय स्थान के अनुसार बदल सकता है; नीचे भारत (IST) के लिए सामान्य विवरण दिया जा रहा है।)
- तिथि: पूर्णिमा
- पक्ष: शुक्ल पक्ष
- वार: आज का वार
- नक्षत्र: चंद्र गोचरानुसार (अक्सर पूर्णिमा पर सौम्य/मध्यम प्रभाव वाला)
- योग: शुभ योग का प्रभाव (ध्यान, दान हेतु अनुकूल)
- करण: अनुकूल करण (पूजा-व्रत के लिए शुभ)
- चंद्र स्थिति: पूर्ण बल में
- अभिजीत मुहूर्त: मध्याह्न के आसपास (सामान्य)
- चंद्र दर्शन: संध्या से रात्रि
👉 शुभ कार्य: व्रत संकल्प, दान, मंत्र-जप, ध्यान
👉 अशुभ से बचें: क्रोध, वाद-विवाद, नशा
2️⃣ पूर्णिमा का ज्योतिषीय महत्व
- मानसिक शुद्धि: चंद्रबल बढ़ने से मन शांत होता है
- भावनात्मक संतुलन: रिश्तों में मधुरता आती है
- आध्यात्मिक उन्नति: साधना, ध्यान और जप का श्रेष्ठ समय
- चंद्र दोष शांति: व्रत-दान से चंद्र दोष में कमी
3️⃣ राशि-वार विस्तृत फल (12 राशियाँ)
♈ मेष: आत्मविश्वास बढ़ेगा, नए अवसर मिलेंगे
♉ वृष: धन व पारिवारिक सुख, कला-सौंदर्य में रुचि
♊ मिथुन: संवाद, लेखन और अध्ययन में लाभ
♋ कर्क: मानसिक शांति, पारिवारिक सामंजस्य
♌ सिंह: नेतृत्व क्षमता में वृद्धि, मान-सम्मान
♍ कन्या: कार्यक्षेत्र में स्पष्टता, स्वास्थ्य में सुधार
♎ तुला: दांपत्य सुख, संबंध मजबूत
♏ वृश्चिक: भावनात्मक गहराई, ध्यान से लाभ
♐ धनु: भाग्य समर्थन, धार्मिक रुचि
♑ मकर: करियर स्थिरता, जिम्मेदारियों में संतुलन
♒ कुंभ: रचनात्मकता, सामाजिक कार्यों में रुचि
♓ मीन: आध्यात्मिक झुकाव, मनोकामना पूर्ति के योग
(यह सामान्य फल हैं; व्यक्तिगत कुंडली अनुसार परिणाम भिन्न हो सकते हैं।)
4️⃣ पूर्णिमा व्रत कथा (संक्षेप)
पौराणिक मान्यता है कि पूर्णिमा व्रत से चंद्र देव प्रसन्न होते हैं। एक राजा को चंद्र दोष के कारण मानसिक कष्ट था। उसने विधिपूर्वक पूर्णिमा व्रत किया, दान-पुण्य और चंद्र अर्घ्य दिया। चंद्र देव की कृपा से उसका दोष शांत हुआ और जीवन में सुख-समृद्धि लौटी। तभी से पूर्णिमा व्रत को मानसिक शांति और सौभाग्य का व्रत माना जाता है।
5️⃣ पूर्णिमा पूजा विधि (स्टेप-बाय-स्टेप)
- प्रातः स्नान कर व्रत संकल्प लें
- स्वच्छ स्थान पर दीपक जलाएँ
- चंद्र देव का ध्यान करें
- “ॐ सोम सोमाय नमः” मंत्र का 108 बार जप
- सायंकाल चंद्र दर्शन कर जल/दूध से अर्घ्य दें
- फलाहार या सात्विक भोजन से व्रत खोलें
6️⃣ विशेष ज्योतिषीय उपाय
🔸 धन के लिए
- सफेद वस्त्र, चावल, दूध या मिश्री का दान
- चांदी का सिक्का पूजा स्थल पर रखें
🔸 स्वास्थ्य के लिए
- चंद्र मंत्र जप
- रात को चंद्रमा को शांत दृष्टि से देखें (कुछ मिनट)
🔸 मनोकामना पूर्ति के लिए
- पूर्णिमा की रात कागज पर इच्छा लिखकर ध्यान करें
- सत्य, संयम और सात्विकता बनाए रखें
7️⃣ क्या करें / क्या न करें
करें: दान, ध्यान, जप, कृतज्ञता
न करें: नशा, झूठ, क्रोध, अपवित्र भोजन
निष्कर्ष
आज की पूर्णिमा मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर है। व्रत, दान और साधना से चंद्रमा की सकारात्मक ऊर्जा जीवन में प्रवाहित होती है। यह दिन नए संकल्प लेने और नकारात्मकता छोड़ने के लिए अत्यंत शुभ है।
✨ पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ!